महिला आरक्षण पर देहरादून में हुंकार, मानसून सत्र में बेशर्त लागू करने की उठी मांग

देहरादून। संसद के आगामी मानसून सत्र में महिला आरक्षण विधेयक को बिना किसी शर्त लागू करने की मांग को लेकर शनिवार को देहरादून स्थित शहीद स्मारक पर अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) के नेतृत्व में विभिन्न महिला एवं सामाजिक संगठनों की संयुक्त सभा आयोजित की गई। सभा में महिला आरक्षण को परिसीमन और जनगणना से जोड़ने का विरोध करते हुए इसे तत्काल लागू करने की मांग उठाई गई।

ऐपवा की राष्ट्रीय सचिव कॉमरेड श्वेता राज ने कहा कि केंद्र सरकार महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर लागू करने में देरी कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं को उनका संवैधानिक अधिकार देने के बजाय राजनीतिक कारणों से टालमटोल की जा रही है। उन्होंने कहा कि संसद के इसी मानसून सत्र में महिला आरक्षण विधेयक को बिना किसी शर्त लागू किया जाना चाहिए।

ऐपवा की उत्तराखंड संयोजक कॉमरेड शिवानी पाण्डेय ने कहा कि वर्तमान सरकार महिलाओं को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के प्रति गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में परिसीमन का आधार जनसंख्या नहीं बल्कि क्षेत्रफल होना चाहिए, ताकि पहाड़ों की समस्याओं का समुचित प्रतिनिधित्व हो सके।

उत्तराखंड महिला मंच की अध्यक्ष कमला पंत ने अंकिता भंडारी हत्याकांड का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस मामले में अब तक प्रभावशाली आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने राज्य में बढ़ते महिला अपराधों पर भी चिंता जताई और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

कांग्रेस नेता प्रेम बहुखंडी ने कहा कि यदि परिसीमन केवल जनसंख्या के आधार पर किया गया तो उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कमजोर हो जाएगा। उन्होंने क्षेत्रफल को भी परिसीमन का आधार बनाने की मांग की।

वरिष्ठ पत्रकार त्रिलोचन भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड में महिलाओं और वंचित वर्गों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिन पर सरकार को गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए। सभा में निर्णय लिया गया कि 20 और 21 जुलाई को महिला आरक्षण विधेयक को बिना शर्त लागू करने की मांग को लेकर उत्तराखंड सहित देशभर में प्रदर्शन किए जाएंगे।

कार्यक्रम में मालती हालदार, प्रियंका खत्री, कमलेश मेहता, कल्पना, स्वाति नेगी, निर्मला बिष्ट, चंद्रकला, विमला कोहली, पद्मा खन्ना, मोहित डिमरी, सतीश धौलाखंडी, मनीष केडियाल, गुणानंद जखमोला सहित विभिन्न महिला, सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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