देहरादून। संविधान हत्या दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोकतंत्र सेनानियों एवं उनके परिजनों को सम्मानित करते हुए वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि तत्कालीन सरकार ने सत्ता बचाने के लिए नागरिक स्वतंत्रताओं और संविधान की मूल भावना पर प्रहार किया था।
जीएमएस रोड स्थित एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष, साहस और बलिदान के कारण ही देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था की पुनर्स्थापना संभव हो सकी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए किए गए उनके योगदान को सदैव याद रखा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकार प्रदान करता है, लेकिन आपातकाल के दौरान इन अधिकारों को कुचलने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि जागरूक जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब दिया और लोकतंत्र को पुनः स्थापित किया।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान और कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही है। वर्ष 2023 में लोकतंत्र सेनानियों की सम्मान निधि को 16 हजार रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रतिमाह किया गया है। साथ ही आपातकाल के दौरान जेल गए लोकतंत्र सेनानियों और उनके आश्रित जीवनसाथियों को विशेष पहचान पत्र भी जारी किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने नई पीढ़ी को लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए कहा कि संविधान के सम्मान और राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ विकसित भारत और श्रेष्ठ उत्तराखंड के निर्माण में सभी को योगदान देना चाहिए।
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक सविता कपूर, उमेश शर्मा काऊ, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष शैलेन्द्र बिष्ट, भाजपा के प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार, महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल मौजूद रहे।

