निदेशालय स्तर पर भी होगा बीमार शिक्षकों का स्वास्थ्य परीक्षण – डाॅ. धन सिंह रावत

देहरादून। विद्यालयी शिक्षा विभाग के अंतर्गत मेडिकल प्रमाण पत्रों के आधार पर स्थानांतरण चाहने वाले बीमार शिक्षकों को दोबारा स्वास्थ्य परीक्षण से गुजरना पड़ेगा। इसके लिये निदेशालय स्तर पर विशेष मेडिकल बोर्ड गठित करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दे दिये गये हैं, ताकि फर्जी मेडिकल बनाने वाले शिक्षकों पर शिकंजा कसा जा सके। इसके अलावा गंभीर बीमारी से ग्रस्त व शारीरिक रूप से अक्षम शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कार्मिकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के निर्देश भी अधिकारियों को दे दिये गये हैं।

सूबे के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने बताया कि राज्य सरकार शिक्षकों के वार्षिक स्थानांतरण के लिये पूरी तरह तैयार है। इसके लिये विभागीय स्तर पर सभी औपचारिकताएं पूरी की जा रही है। उन्होंने कहा कि विभागीय उच्च स्तरीय बैठक में स्थानांतरण प्रक्रिया को निष्पक्ष व पारदर्शी बनाने के लिये कई अहम निर्णय लिये गये हैं। खासकर मेडिकल प्रमाण पत्रों की आड़ में स्थानांतरण का लाभ उठाने वाले शिक्षकों पर इस बार शिकंजा कसा जाएगा। डाॅ. रावत ने कहा कि स्थानांतरण में मेडिकल आधार पर मिलने वाली छूट का दुरूपयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जायेगा। इसके लिये उन्होंने विद्यालयी शिक्षा महानिदेशक को निदेशालय स्तर पर शीघ्र विशेष मेडिकल बोर्ड गठित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि मेडिकल बोर्ड शिक्षकों के स्वास्थ्य दावों की जांच के लिये दोबारा उनका मेडिकल परीक्षण करेगा। इसके साथ ही उनके माता-पिता, सास-ससुर, पति-पत्नी अथवा बच्चों का भी स्वास्थ्य परीक्षण कराया जायेगा, जिनके नाम पर गंभीर बीमारी संबंधी स्वास्थ्य प्रामण पत्र प्रस्तुत किया गया है। इसके अलावा राज्य स्तरीय चिकित्सा बोर्ड द्वारा जारी स्वास्थ्य प्रमाणपत्रों की प्रमाणिकता का भी सत्यापन किया जायेगा, यदि जांच में स्वास्थ्य प्रमाण पत्र फर्जी अथवा तथ्यों के विपरीत पाया जाता है तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जायेगी। डाॅ. रावत ने कहा कि उन्हें विभिन्न माध्यमों से लगातार ऐसी शिकायतें प्राप्त हुई हैं कि पूर्व के वर्षों में कुछ शिक्षकों ने फर्जी चिकित्सा प्रमाणपत्रों के आधार पर स्थानांतरण अधिनियम के प्रावधानों में छूट प्राप्त कर अपनी पसंद के विद्यालयों में तैनाती हासिल की। ऐसी अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए यह व्यवस्था लागू की जा रही है।

विभागीय मंत्री डाॅ. रावत ने कहा कि जो शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी वास्तव में गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं अथवा शारीरिक रूप से अपने दायित्वों के निर्वहन करने में असमर्थ हैं, उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जायेगी, ताकि उन्हें अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े और विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित न हो। इसके लिये उन्होंने सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिये कि वह अपने-अपने जनपदों में गंभीर रूप से बीमार एवं शारीरिक रूप से अक्षम शिक्षकों तथा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की सूची शीघ्र तैयार कर निदेशालय को उपलब्ध कराये, जिससे आवश्यक कार्रवाई समयबद्ध ढंग से सुनिश्चित की जा सके।

स्थानांतरण के लिये शिक्षा विभाग को मिला 55 दिन का अतिरिक्त समय
डाॅ. रावत ने बताया कि शिक्षा विभाग द्वारा अनुरोध के आधार पर शिक्षकों के तबादलों के लिये समय विस्तार एवं स्थानांतरण एक्ट से छूट की मांग कार्मिक विभाग से की थी। जिसके क्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिक्षकों के स्थानांतरण के लिये विभाग को 55 दिन का अतिरिक्त समय की मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू कर शिक्षकों से आॅनलाइन आवेदन मांगे जायेंगे। जिसके उपरांत आवश्यकतानुसार विद्यालयों में रिक्त पदों के सापेक्ष शिक्षकों को तैनाती दी जायेगी।

 

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